नेवी में शामिल हुआ आईएन एलसीयू एल-56

पूर्वी नौसेना कमान के एवीएसएम, वीएसएम फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल अतुल कुमार जैन ने 29 जुलाई को नेवल डॉकयार्ड, विशाखापत्तनम में हुए एक समारोह में लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी (एलसीयू) एमके 4 की छठी श्रेणी के जहाज आईएन एलसीयू एल-56 को भारतीय नौसेना में शामिल किया। एलसीयू 56 जहाज से तट तक प्रमुख युद्धक टैंक, बख्तरबंद वाहन, सेनाओं और अन्य उपकरणों की ढुलाई और तैनाती की प्राथमिक भूमिका निभाने वाला एक अहम पोत है। एलसीयू 56, एएनसी में एनएवीसीसी के अंतर्गत पोर्ट ब्लेयर में काम करेगा और तैनात रहेगा।

इसके पूर्व मुख्य अतिथि को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ समारोह की शुरुआत हुई। उद्घाटन भाषण जीआरएसई, कोलकाता के सीएमडी रियर एडमिरल वीके सक्सेना ने दिया। उनके बाद कोमोडोर आशुतोष रिढोरकर एनएवीसीसी ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कमांडर गोपीनाथ नारायणन ने जहाज के कमीशनिंग वारंट को पढ़ा। पहली बार जहाज पर नौसेना का ध्वज लगाया गया। समापन के मौके पर राष्ट्र गान के साथ ध्वजारोहरण किया गया। वाइस एडमिरल जैन ने देश में 100वां युद्ध पोत का निर्माण करने वाला पहला शिपयार्ड बनने के लिए जीआरएसई को बधाई दी। कहा कि एलसीयू 56 के शामिल होने से एएनसी की समुद्री और एचएडीआर क्षमता बढ़ेगी। जहाज को अंडमान निकोबार द्वीप समूह के आसपास समुद्र तट संचालन, खोज और बचाव अभियानों, आपदा राहत, तटीय गश्त और निगरानी जैसी मल्टी-रोल गतिविधियों में लगाया जाएगा। उन्होंने उद्घाटन पट्टिका का अनावरण किया और इस जहाज को राष्ट्र के लिए समर्पित किया।

समारोह में पीवीएसएम एवीएसएम कंट्रोलर ऑफ वारशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन आईएचक्यूएमओडी (एन), अंडमान एंड निकोबार कमांड (एएनसी) के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल बिजि मैथ्यू, नेवल कम्पोनेंट कमांडर (एनएवीसीसी) एएनसी में कोमोडोर आशुतोष रिढोरकर, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स (जीआरएसई) के सीएमडी रियर एडमिरल वी के सक्सेना (सेवीनिवृत्त) के साथ ही ईएनसी के सभी फ्लैग अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

एलसीयू मार्क-4 का प्रमुख कार्य
एलसीयू मार्क-4 का प्रमुख कार्य जहाज से तट तक और प्रमुख लड़ाकू टैंकों, बख्‍तरबंद गाड़ियों, टुकडियों और उपकरणों को ले जाना है। ये युद्ध पोत अंडमान एवं निकोबार कमांड में है और इसकी तैनाती किनारे के संचालन, बचाव राहत कार्य, आपदा राहत कार्य, आपूर्ति व भरपाई और दूर के द्वीपों से निकासी में की जाती है। 

L-56
216 कर्मी रह सकते हैं युद्ध पोत में
युद्ध पोत में 216 कर्मी रह सकते हैं। यह लैंडिंग कार्य के दौरान तोप दागने में सहायक दो स्‍वदेशी सीआरएन 91 तोपों से लैस है। इसमें अत्‍याधुनिक उपकरण लगे हैं और एकीकृत ब्रीज प्रणाली (आईबीएस) व एकीकृत प्‍लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली (आईपीएमएस) जैसी अग्रिम प्रणालियां लगाई गई है।

90 प्रतिशत कलपुर्जें स्‍वदेशी
एलसीयू मार्क-4 युद्ध पोत में आत्‍मनिर्भरता व स्‍वदेशीकरण के लक्ष्‍य को हासिल करने की दिशा में भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के अनुरूप 90 प्रतिशत कलपुर्जें स्‍वदेशी हैं। एलसीयू मार्क-4 युद्ध पोत भारतीय नौसेना द्वारा इस्‍तेमाल किए जा रहे मार्क-3 एलसीयू जहाजों के उन्‍नत संस्‍करण हैं। 

(स्रोत-पीआईबी, 29 जुलाई 2019)

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