आरएंडडीः जीडीपी के 0.6 से 0.7% निवेश

आरएंडडीः खर्च प्रणाली पर रिपोर्ट जारी
वैश्विक नवाचार सूचकांक (जीआईआई) 2019 के नई दिल्‍ली में उद्घाटन के दौरान भारत के अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) से संबंधित खर्च की प्रणाली पर चर्चा करने के लिए विशेष सत्र का आयोजन किया गया।

जीडीपी के 0.6 से 0.7 प्रतिशत निवेश
आरएंडडी में होने वाले निवेश आर्थिक विकास के प्रमुख इनपुट हैं। इनका प्रभाव उत्पादकता, निर्यात, रोजगार और पूंजी निर्माण पर सिद्ध हो चुका है। आरएंडडी में भारत के निवेश में पिछले कुछ वर्षों में लगातार वृद्धि दर्शाई गई है। हालांकि यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का एक अंश भर है। यह भारत के जीडीपी के लगभग 0.6 प्रतिशत से 0.7 प्रतिशत पर स्थिर बना हुआ है। यह अमेरिका (2.8), चीन (2.1), इजरायल (4.3) और कोरिया (4.2) जैसे देशों के खर्च से कम है।

लोक उद्यम विभाग में सचिव सीमा बहुगुणा भारत के अनुसंधान एवं विकास से संबंधित खर्च की प्रणाली पर विशेष सत्र को सम्‍बोधित करते हुए। image credit pib

राज्य व निजी क्षेत्र की भागीदारी जरूरी
सरकारी खर्च, लगभग पूर्ण रूप से केंद्र सरकार, भारत में आरएंडडी की प्रेरक शक्ति है, जो उन उन्नत देशों के विपरीत है, जहां निजी क्षेत्र आरएंडडी पर होने वाले खर्च के प्रबल और प्रेरक बल हैं। भारत में समूचे आरएंडडी खर्च विशेष रूप से अनुप्रयोगोन्‍मुखी अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास के क्षेत्र में होने वाले खर्च में राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी की आवश्यकता है।

आरएंडडी की गाथा एक दिलचस्प मोड़ पर 
इस अवसर पर लोक उद्यम विभाग में सचिव सीमा बहुगुणा ने कहा कि भारत की आरएंडडी की गाथा एक दिलचस्प मोड़ पर है, जहां सरकार के स्वामित्व वाली सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। अप्रैल 2018 में दिल्ली में सीपीएसई कॉन्क्लेव में सीपीएसई के साथ बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री ने इस बात को रेखांकित किया था कि सीपीएसई द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारियों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए सहयोगपूर्ण आरएंडडी पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए। उन्‍होंने बताया कि प्रधानमंत्री के साथ बातचीत के बाद अब यह अनिवार्य कर दिया गया है कि सभी सीपीएसई नवाचार प्रकोष्ठों की स्थापना करेंगे, जो बाजारोन्मुख अनुसंधान पर काम करेंगे।

सीपीएसई ने 154 नवाचार प्रको‍ष्‍ठ स्‍थापित किए
सीपीएसई द्वारा ऐसे 154 नवाचार प्रको‍ष्‍ठों की स्‍थापना की गई है, जहां ओडिशा में स्थित नाल्‍को मिधानी लीथियम-एल्युमिनियम मिश्र धातु संयंत्र जैसे अनुसंधान की तरह अधिक राख वाले भारतीय कोयले से मेथनॉल का सृजन करने पर भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड द्वारा अनुसंधान किया जा रहा है और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की ओर से रक्षा बलों द्वारा उपयोग के लिए विभिन्न प्रकार के विमान/हेलीकॉप्टर के लिए एरो इंजन पर काम किया जा रहा है।

सीपीएसई ने आरएंडडी खर्च में 116% वृृद्धि की 
लोक उद्यम विभाग में सचिव सीमा बहुगुणा ने बताया कि वर्ष 2014-15 से 2017-18 तक सीपीएसई द्वारा आरएंडडी खर्च में 116 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्‍होंने कहा कि आज के दौर में जरूरत इस बात की है कि आरएंडडी पर सबसे अधिक खर्च कर रहे पेट्रोलियम और बिजली क्षेत्र के सीपीएसई को ही नहीं, बल्कि समस्‍त सीपीएसई को आरएंडडी पर अधिक खर्च के लिए आगे आना चाहिए।

रिपोर्ट का संकलन पीएमईएसी ने किया 
इस रिपोर्ट का संकलन पीएमईएसी द्वारा किया गया है और इसके लिए जानकारी उद्योग, शिक्षा और सरकार सहित विभिन्न हितधारकों से ली गई है।

खामियों को दूर करना है उद्देश्य 
रिपोर्ट के जारी होने के बाद, पीएमईएसी में सदस्य सचिव रतन वाटल ने बताया कि रिपोर्ट का उद्देश्य आरएंडडी आंकड़ों के संकलन में मौजूद खामियों को दूर करना है ताकि आरएंडडी के बारे में विश्वभर में भारत के वास्तविक दर्जे को दर्शाने के लिए अद्यतन आंकड़ों को उपलब्‍ध कराया जा सके। दूसरा उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में खर्च के रुझानों और उनकी खामियों की जांच करना है। अंतिम उद्देश्य वर्ष 2022 तक आरएंडडी पर होने वाले खर्च के वांछित लक्ष्‍य को प्राप्त करने की योजना तैयार करना है। उन्होंने कहा कि भारत को आरएंडडी पर राष्ट्रीय व्यय में वृद्धि करते हुए विज्ञान और अनुसंधान प्रणाली में अपनी रैंकिंग में सुधार करने के अपने प्रयासों को फिर से दोगुना करने की आवश्यकता है। आरएंडडी से संबंधित खर्च में वृद्धि जीडीपी की वृद्धि के अनुरूप होनी चाहिए। साल 2022 तक उसे जीडीपी के कम से कम दो प्रतिशत तक पहुंच जाना चाहिए।

विशेष सत्र में ये रहे उपस्थित
विशेष सत्र में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर के. विजयराघवन, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) में सदस्य सचिव रतन वाटल, लोक उद्यम विभाग में सचिव सीमा बहुगुणा, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय में वैज्ञानिक सचिव डॉ. अरबिंद मित्रा और पीएमईएसी में वरिष्ठ सलाहकार बी.एन. सतपथी, उपस्थित थे।

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