जीआईआई-2019: भारत की बड़ी उपलब्धि

‘जीआईआई-2019’ में भारत 52वें पायदान पर
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में ‘वैश्विक नवाचार सूचकांक (जीआईआई) 2019’ को लांच किया। भारत इस सूचकांक में पिछले वर्ष के 57वें पायदान से पांच स्थान ऊपर चढ़कर वर्ष 2019 में 52वें पायदान पर पहुंच गया है।

जीआईआई के शीर्ष 25 देशों में शुमार करने के लक्ष्य
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने इस अवसर पर सबसे पहले इस प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी। कहा कि भारत ऊंची छलांग लगाकर जीआईआई-2019 में 52वें पायदान पर पहुंच गया है। नवाचार की संस्कृति अब अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। गोयल ने कहा भारत जीआईआई में 50वें पायदान पर पहुंचने के लिए अपने अथक प्रयासों को निरंतर जारी रखेगा। जैसा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लक्ष्य तय किया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अतीत की उपलब्धियों पर तब तक संतुष्ट होकर नहीं बैठेगा, जब तक कि वह वैश्विक नवाचार सूचकांक के शीर्ष 25 देशों में अपने आपको भी शुमार करने के लक्ष्य को हासिल नहीं कर लेगा। उन्होंने इस रैंकिंग को हासिल करने के लिए सभी हितधारकों से इस दिशा में एक मिशन के रूप में काम करने का अनुरोध किया।

infographics credits wipo
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ग्रामीण नवाचार को भी इसमें शामिल करने का आग्रह 
गोयल ने अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) संस्थानों, विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र से देश को एक नवाचार केन्द्र में तब्दील करने का अनुरोध किया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (विपो) से भविष्य में नवाचार सूचकांक के हिस्से के रूप में भारत के ग्रामीण नवाचार को भी इसमें शामिल करने का आग्रह किया।

समस्याओं के टिकाऊ समाधान ढूंढे जाने पर जोर
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उपर्युक्त रैंकिंग में हुए सुधार से देशवासियों को प्रेरित होकर समाज के हाशिये पर पड़े लोगों के साथ-साथ वंचित तबकों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। अनुसंधान एवं विकास के जरिए भारत के समक्ष मौजूद विभिन्न समस्याओं के टिकाऊ समाधान ढूंढे जाने चाहिए। शहरों में बढ़ते प्रदूषण स्तर, देश के विभिन्न हिस्सों में गहराया जल संकट, तेजी से खत्म होते प्राकृतिक संसाधन, जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दे और खाद्य पदार्थों की बर्बादी इन समस्याओं में शामिल हैं। देश के समक्ष मौजूद इन सभी समस्याओं का समाधान अभिनव आइडिया के जरिए किया जाना चाहिए। भारत को निश्चित तौर पर एक उत्तरदायी देश होना चाहिए और इसके साथ ही यहां तक कि देश के सुदूरतम इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में बेहतरी के लिए शिक्षाविदों, निजी क्षेत्र और सरकारी एजेंसियों की सेवाएं लेकर इस दिशा में एक मिशन के रूप में काम करना चाहिए।

थीम ‘स्वस्थ जीवन का सृजन-चिकित्सा नवाचार का भविष्य’
इस वर्ष की जीआईआई थीम ‘स्वस्थ जीवन का सृजन-चिकित्सा नवाचार का भविष्य’ का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि भारत सरकार न केवल उपचारात्मक, बल्कि निवारक स्वास्थ्य सेवा पर भी फोकस कर रही है, जिसके तहत अच्छा स्वास्थ्य (वेलनेस) सुनिश्चित करना समाज का हिस्सा बन जाता है।

129 अर्थव्यवस्थाओं की जीआईआई रैंकिंग का 12वां संस्करण
जीआईआई रैंकिंग का प्रकाशन हर साल कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, इन्सीड और संयुक्त राष्ट्र के विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (विपो) तथा जीआईआई के ज्ञान साझेदारों द्वारा किया जाता है। यह 129 अर्थव्यवस्थाओं की जीआईआई रैंकिंग का 12वां संस्करण है, जो 80 संकेतकों पर आधारित है। बौद्धिक संपदा संबंधी आवेदन दाखिल करने की दरों से लेकर मोबाइल-एप्लीकेशन बनाना, शिक्षा पर व्यय और वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी प्रकाशन तक इन संकेतकों में शामिल हैं।

(स्रोत -पीआईबी, 24 जुलाई 2019)

‘जीआईआई’ में स्विट्जरलैंड अब भी पहले पायदान पर
‘जीआईआई’ में स्विट्जरलैंड अब भी पहले पायदान पर है। इसके बाद स्वीडन, अमेरिका, नीदरलैंड, ब्रिटेन, फिनलैंड, डेनमार्क, सिंगापुर, जर्मनी और इजरायल का नंबर आता है। इसी क्रम में इनके बाद कोरिया, रिपब्लिक आफ, आयरलैंड, हांकांग (चीन), चीन, जापान, फ्रांस, कनाडा, लक्जमबर्ग, नार्वे एवं आइसलैंड का नंबर आता है

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मध्य और दक्षिणी एशिया में भारत का शीर्ष स्थान
भारत इस वर्ष 52वीं रैंक वाली अर्थव्यवस्था के रूप में मध्य और दक्षिणी एशिया क्षेत्र में अपना शीर्ष स्थान रखता है। साल 2015 में भारत की रैंकिंग 81वीं थी। भारत का जीआईआई में 29 स्थान का सुधार किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था द्वारा सबसे बड़ी छलांग को दर्शाता है। अपने उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक प्रकाशनों और विश्वविद्यालयों के कारण, भारत नवाचार की गुणवत्ता में मध्यम-आय वाली अर्थव्यवस्थाओं में द्वितीय स्थान पर है। यह कई महत्वपूर्ण संकेतकों जैसे उत्पादकता वृद्धि और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी से संबंधित सेवाओं के निर्यात में शीर्ष रैंक रखता है। इस वर्ष भारत वैश्विक कंपनियों के अनुसंधान एवं विकास व्यय में 15वें स्थान पर पहुंच गया है। यह वैश्विक शीर्ष 100 समूहों में शामिल बेंगलुरु, मुंबई और नई दिल्ली के साथ विश्व के शीर्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी समूहों पर जीआईआई रैंकिंग में भी शामिल है। 

(स्रोत-डब्लूआईपीओ, 24 जुलाई 2019)

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